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योग 

किरण कुमारी

प्रातः बेला ही जगे, करने वाले योग।

रखते मन को शांत यूँ, रहती देह नीरोग।।

 

आसन वैसे हैं कई, सबके लाभ अनेक।

इक सूर्य नमस्कार ही,शक्ति भरे अतिरेक।।

 

करके ताड़ासन क्रिया, रखे रिढ़ मजबूत।

तन की लंबाई बढ़े ,सुन ले बेटी पूत।।

 

वृक्षासन में वृक्ष सम,

बन जाए अब आप।

रखे एकाग्र चित्त को , क्रोध उडे बन भाप।।

 

बालासन विधि योग से ,मेटे सभी थकान। आती-मीठी नींद यूँ, सोते चादर तान।।

 

विधि भुजंगासन भला ,घटी कमर की पीर।

वसा पेट का कम करें, करते रहिए धीर।।

 

योग शवासन से मिटे, हर मानसिक तनाव।

बहुत सरल यह योग है, दिखता शीघ्र प्रभाव।।

 

खींचे छोड़ें श्वास को, क्रिया योग आसान।

कुछ क्षण दे निज देह को ,भोर पहर यह ठान।।

 

सुखमय जीवन बीतती, रखे वैद्य से दूर।

रखे सहज आहार भी, खुशी मिले भरपूर।।

 

आलस देखें छोड़कर, कथन सुने हर बार।

योग नियम से ज्यो करें , जोड़े सुख से तार।।

 

तन मन से कोई बड़ा, नहीं जगत में तात।

मूल्य समझ ले शीघ्र ही,यही बड़ी है बात।।

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