साहित्य

अनुभूति 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

आँखों से पहचान नहीं, मन से अनुभूति होती।

मौन हृदय की गहराई में, जीवन-ज्योति संजोती॥

 

शब्द बहुत कुछ कह जाते हैं, भाव अमर बन जाते।

आत्मा तक जो उतर सके, वे ही सत्य कहाते॥

 

सुख क्षणभर मुस्कान दे, दुःख जीवन गढ़ जाता।

तपकर कुंदन-सा मानव, अनुभव-धन पा जाता॥

 

जहाँ हृदय में करुणा जागे, वहीं मनुजता रहती।

सूनी होती प्रीति वहाँ, संवेदना जब बहती॥

 

धन से केवल भवन सजें, मन का शून्य न भरता।

अनुभूति का दीप जले तो, हर अँधियारा डरता॥

 

पद-प्रतिष्ठा व्यर्थ सभी हैं, यदि मन कठोर बना हो।

श्रेष्ठ वही जो पर-पीड़ा को, अपना दुःख माना हो॥

 

अंतर में विश्वास जगा, अहंकार दूर भगाओ।

अनुभूति के पावन पथ पर, जीवन सफल बनाओ॥

 

मौन प्रकाश यही अंतस का, सच्ची राह दिखाता।

स्वयं से मिल मानव को, मानवता तक लाता॥

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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