
छुट्टियों की मस्ती बीती, आया पढ़ने का त्योहार,
फिर से गूँजा विद्यालय में बच्चों का मधुर पुकार।
नई कक्षा, नई किताबें, नए सपनों की उड़ान,
मन में लेकर ढेर उमंगें पहुँचे सारे नन्हे प्राण।
चमक रहे हैं नए बस्ते, महक रही हर कॉपी है,
ज्ञान बाँटने को तत्पर फिर गुरुजनों की टोली है।
कोई मित्रों से मिलकर हँसे, कोई नए दोस्त बनाए,
कोई अपने छोटे-छोटे सपनों को मन में सजाए।
घंटी बोली — “आओ बच्चों, अब मेहनत का समय हुआ”,
आलस की हर धूल झटककर आगे बढ़ने का क्षण हुआ।
शब्द-शब्द से ज्ञान मिलेगा, अक्षर-अक्षर दीप बने,
छोटे-छोटे ये प्रयास ही जीवन का संगीत बने।
विद्यालय का आँगन जैसे खुशियों का संसार लगे,
हर बच्चे की भोली मुस्कान फूलों का उपहार लगे।
आओ मिलकर प्रण ये लें, नाम देश का ऊँचा होगा,
सच्ची मेहनत करने वाला हर बच्चा अनमोल होगा।
नई सुबह है, नया सफर है, नई आशा का संचार,
फिर से गूँजा विद्यालय में बच्चों का मधुर पुकार॥
~जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी “जीत” छत्तीसगढ़



