
भोले भक्ति में मार ले गोते,
लूट ले मोती सारे,
मन तेरा बेकल नहीं होगा,
बह जा गंग की धारे।
भोले भक्ति में …
भोले शब्द में शहद घुला है,
ये जीवन को तारे,
समय मिला जप ले तू भोले,
क्यूं अपने मन को मारे।
भोले भक्ति में …
करते-करते दर्शन भोले,
अंतस मालामाल हुआ,
पंचमुखी है रूप तुम्हारा,
लगता मायाजाल हुआ।
भोले भक्ति में …
नजर नहीं लग जाए भोले,
हमको तेरी भक्ति में,
इसीलिए जपते हैं भोले,
मिल जाएं तेरी शक्ति में।
भोले भक्ति में ……
आओ हिल मिल हम भोले का,
ऐसा रूप बखान करें,
कहीं नहीं जाएं ये भोले,
बस दिल मेरे विश्राम करें।
भोले भक्ति में …
( 276/334 वां मनका )
कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
गांधीनगर इन्दौर (म.प्र.)




