
यह है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ मध्य प्रदेश के आदिवासी पिछड़े अंचल का सैकड़ों उपलब्धि को समेटे हुए जो आज विश्व पटल पर दस्तक दे पढ़ा और अच्छा सुना जाता हैं जिसे अंग्रेजी में अपना नाम लिखते नही आता वह डॉ चंचल की अंग्रेजी अनुवाद लघु कथाओं की कालजयी कृति अनुवाद किया डॉ पुलकिता जी आनंद द्वारा सराही जा रही है बेहिसाब पढ़ा जाता हूं उन्हीं के अंग्रेजी भाषा में अनुवाद काली लघु कथा को 35 हजारों द्वारा सराही गई देश और दुनिया में
उनकी कई भाषाओं के साथ अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कविता को भी सम्मान से पढ़ा और सुना जाता है
है न चौकने वाला सत्य पर सत्य सत्य है कोई माने या न उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है वह मुस्कराता हुआ सदा ही अपनी फ़क़ीरी मैं मस्ती में मस्त रहता हूं जानता है सत्य आज की दुनियां को
सचमुच ईश्वरीय आशीष रूह आशीष को सत् सत् वंदन करते हुए डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ सहज सरल व्यकित्व और सादगी लिए जीता हुआ फकीरी में चर्चित नाम है
यह है उनका अपनी भाषा हिंदी से अथाह प्यार और अपनापन कहां है आज ऐसे विरले लोग जो झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल की पावन पवित्र धरा को धन्य कर रहे हैं




