“दोहा संग्रह पा-ए-पा का लोकार्पण सम्पन्न”
“दोहा संग्रह पा-ए-पा का लोकार्पण सम्पन्न
दिनांक 05.07.2026 को अणुव्रत भवन 120, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग नई दिल्ली मैं साहित्य कुंभ चांद साल के साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा का लोकार्पण और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा में कुएं 26 रचनाकारों के दोहों का संकलन किया गया है। इस साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा को अजय प्रकाशन, उत्तम नगर, नई दिल्ली के द्वारा प्रकाशित किया गया है।
लोकार्पण के कार्यक्रम से पूर्व तेरापंथ धर्म संघ की विदुषी साध्वी श्री सुब्रता से साहित्य छंद कुंभशाला के सभी सदस्यों ने सामूहिक मंगल पाठ का श्रवण किया। उनके आशीर्वाद एवं स्नेहाशीष से कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ।
लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि धर्मपाल धर्म जी ने की। लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आर० के० प्रजापति ‘साथी’, विशिष्ट अतिथि निर्मल चौरड़िया, संयोजिका हिम्मत चौरड़िया, व्यवस्थापिका कल्पना सेठिया व संचालिका वरिष्ठ कवयित्री संतोष सम्प्रति रहीं।
सर्वप्रथम मंचासीन मुख्य अतिथि अध्यक्ष विशिष्ट अतिथि आदि के द्वारा विद्या की देवी माता सरस्वती जी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात इंदु चांडक के द्वारा बहुत ही मधुर स्वर में सरस्वती माॅं की वंदना की गई।
सरस्वती माता की वंदना के पश्चात कल्पना सेठिया के द्वारा मंच पर आसीन अध्यक्ष, मुख्यअतिथि, विशिष्ट अतिथि व अणुव्रत भवन के भूतल स्थित सभागार में उपस्थित सभी रचनाकारों व अतिथियों का स्वागत किया गया।
स्वागत सत्कार के बाद साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा का करतल ध्वनि के बीच लोकार्पण किया गया। लोकार्पण के पश्चात क्रमशःमुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि के आशीर्वचन के उपरांत संयोजिका व अध्यक्ष के द्वारा साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा के प्रकाशन के विचार व प्रकाशन के विषय में विस्तार से अपनी बात रखी गई।
इसके बाद सेठिया परिवार के द्वारा धर्मपाल धर्म व हिम्मत चौरड़िया का सम्मान किया गया। कुछ अन्य रचनाकारों के द्वारा भी इनका सम्मान किया गया। इसके पश्चात धर्मपाल भइया के द्वारा अपने गुरुदेव आर०के० प्रजापति ‘साथी’ का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। संचालिका संतोष सम्प्रति जी के द्वारा प्रथम सत्र के कार्यक्रम समाप्त होने, दोपहर के भोजन हेतु सूक्ष्म अवकाश व भोजन के तुरंत बाद पुनः सभागार में एकत्र होने की घोषणा की गई।
द्वितीय सत्र के प्रारम्भ में सभागार में उपस्थित व मंचासीन अतिथियों के द्वारा अपना सूक्ष्म परिचय दिया गया। परिचय के बाद हिम्मत दीदी व निर्मल चौरड़िया जी के द्वारा आर०के० प्रजापति ‘साथी’ व धर्मपाल धर्म का सम्मान किया गया। शीला संचेती व भारती जी द्वारा अपने द्वारा लिखी गयी पुस्तकें मंचासीन गणमान्यों को भेंट स्वरूप प्रदान की गई।
इसी कार्यक्रम में हिम्मत दीदी की पुस्तक हिम्मत की उड़ान(कुण्डलिया छंद संग्रह) के लोकार्पण का कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ।
कुण्डलिया संग्रह के लोकार्पण के बाद साझा दोहा संग्रह पा-ए-पा के सभी रचनाकारों व अन्य उपस्थित अतिथियों को अंगवस्त्र, अभिनंदन पत्र व मोमेंटो से मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अध्यक्ष व संयोजिका द्वारा सम्मानित किया गया व सभी का संयुक्त फोटो सेशन भी हुआ।
इसके बाद मंचासीन गणमान्यों के साथ ही साथ सभी रचनाकारों के द्वारा दोहो व कविताओं का बहुत शानदार पाठ किया गया। सबकी रचनाएँ सुनकर आनंद की अनुभूति का वर्णन करना सम्भव नहीं।
अंत में पुखराज सेठिया के द्वारा आभार व्यक्त किया गया व शाम की चाय हेतु आमंत्रित किया गया। इस सब के बीच कल्पना सेठिया के द्वारा यह शुभ समाचार दिया गया कि आज ही कनक पारख व राजकरण पारख के विवाह की वर्षगाँठ भी है। चाय से पूर्व विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर केक काटा गया व सभी ने उन्हें अपनी अपनी ओर से शुभकामनाएं प्रदान कीं।
चाय के बाद आया विदाई का वह क्षण जो सबसे अधिक कष्टप्रद होता है। ऐसे ही किसी कार्यक्रम में पुनः मिलने के वचन के साथ धीरे धीरे सभी ने अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।
अगर इस समीक्षा में दो बातों का उल्लेख न किया गया तो यह अधूरी ही रह जायेगी। प्रथम कल्पना सेठिया ने जिस प्रकार अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इस पूरे आयोजन की व्यवस्था की वह बहुत ही प्रशंसनीय था। शानदार, लजीज व स्वादिष्ट नाश्ते, दोपहर के भोजन व चाय की बहुत ही दिव्य व्यवस्था की गई। प्रत्येक व्यक्ति से व्यक्तिगत रूप से नाश्ते व भोजन का आग्रह किया गया जो उनके प्रेम को दर्शाता है।
दूसरी उल्लेखनीय बात रही संतोष सम्प्रति का संचालन। उन्होंने अपने संचालन से सभी उपस्थित अतिथियों को 5 से 6 घण्टे तक अपनी वाणी के जादू व कुशल संचालन से इस प्रकार बांध कर रखा कि कोई अपनी जगह से एक पल के लिए चाह कर भी हिल नहीं सकता था।




