साहित्य

धाक जमी जग भाषा प्यारी

डॉमंजु गुप्ता

भारत माँ की लगती बिंदी

 

क्या सखि नारी,ना सखी हिंदी।।1

 

 

 

धागे में लिपटा अजब प्यार

 

आए यह जब गजब त्यौहार

 

बाँधे रक्षा प्यारी साखी

 

क्या सखि साजन? न सखी राखी।।2

 

 

 

जिसने होंठों से उसे लगाया

 

उसके गम तो सभी ने भुलाया

 

उसमें वो सब सजाता ख्बाव

 

क्या सखी साजन ?न सखी, शराब ।3

 

 

 

नील गगन पर वह नित मटके

 

हर ओर चमक,उसकी चमके

 

देख उसे हो , मन आनंदा

 

क्या सखि साजन ?न सखि, चंदा ।4

 

 

 

जब भी बाहर को मैं जाती

 

जब भी बाहर से मैं आती

 

चलता मेरे संग निपूता

 

क्या सखि साजन ? न सखी ,जूता ।5

 

 

 

जब – जब भोर गगन में छाए

 

खुशहाली की किरणें लाए

 

छूए हैं जड़ – चेतन की रज

 

क्या सखि साजन , न सखी सूरज ।6

 

 

 

 

 

पाँच अक्षरों का मेरा नाम

 

दक्षिण में मेरा है निज धाम

 

नहीं किसी भाषा से मैं कम

 

क्या सखि साजन ? ना , मलयालम ।7

 

 

 

जाग – सो के देखूँ मैं उसे

 

उमंग – तरंग बढ़ाते इसे

 

कदम – कदम पर लगता अपना

 

क्या सखि साजन ?ना सखि , सपना।।8

 

 

 

उसको देखूँ छाए लाली

 

खुशियों की लाए उजियाली

 

समरस हो कर सींचे मन रज

 

क्या सखि साजन ? ना सखि , सूरज।।9

 

 

 

श्याम रंग छवि मुझको भाये

 

पनघट पर वह रास रचाए

 

देख उसे मन करता वंदन

 

क्या सखि साजन ?न, नंद नंदन।।10 डॉमंजु गुप्ता , वाशी , नवी मुंबई

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