
शब्द हुआ करते है दर्पण
जीवन को दिखलाते हर क्षण,
कागज पर कवि उतारा करता
नारी सशक्तकरण
बेटी बचाओ
बेटी पढ़ाओ
बाल मजदूरी
आदि-आदि,कितनों पर कितनों ने लिखा,
नहीं एक भी गया
उन गलियों में
जहाँ छोड़ा नारी को बेबसी में,
कभी दाग लगा, कभी रेप हुआ
कभी गर्भ से करके
नारी को छोड़ दिया,
बातें ऊँची-ऊँची लिखते है
पर दुःख में काम नहीं आते।
उन गलियों के अंदर जाकर
उनके जीवन को केनवास बनाकर,
झांको और भरो रंग उनके जीवन में,
पृष्ठ कोरा रह जायेगा
मेहनत करोगे गर तो
किसी के जीवन में रंग भर जायेगा।
स्वरचित
डॉ. प्रभा जैन श्री
देहरादून




