
बार-बार पाकर-खोने का,गाना उसको गाना है।
मनुज अकेला जब है आया, उसे अकेला जाना है।।
क्यों आशाओं को वो जोड़े,बातें क्यों दुहराना है।
भला भरोसा क्यों दूजे पर,उसको आखिर पाना है।।
अपने दीपक तुम बन जाओ,गहरा तमस मिटाना है।
मनुज अकेला जब है आया,उसे अकेला जाना है।।
भला प्रतीक्षा कैसी करनी,विजय इंद्रियों पर पाओ।
अपने स्वामी तुम बनकर के,जय पथ पर बढ़ते जाओ।।
दुख के पन्नें मत पलटो तुम,पीर हृदय बिसराना है।
मनुज अकेला जब है आया,उसे अकेला जाना है।।
मजबूती से हृदय पकड़ना,हृदय काँच जैसा होता।
एक बार जो ये टूटेगा,चुभकर खुद में ही रोता।।
जन्म-मृत्यु के चक्रव्यूह में,सबको जाना-आना है।
मनुज अकेला जब है आया,उसे अकेला जाना है।।
वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’
वाराणसी
उ.प्र.




