
आओ दोस्ती में कुछ ऐसा कर जाए,
एक दूसरे पर जाँ निसार कर जाएं।
घना अंधेरा था जो अपनी राहों में,
मुस्कुराहटों से अपनी दूर कर जाए।
कभी आए जरा सीआँच अपने पर तो,
तो एक दूसरे के आगे ढाल बन जाए।
देखे दुनिया तो देखती ही रह जाए,
ऐसी पवित्र मोहब्बत की मिसाल बन जाए।
न कोई शिकवा न गिला दिल में दोनों के रहे,
रंजो गम सारे खुशी से दर गुज़र हो जाए।
दुआ यही है “आकाश” रब से हर घड़ी,
दोस्त पर अपनी हर खुशी कुर्बान हो जाए।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश




