
गुरु महिमा का शब्दों में क्या करूं बखान,
गुरु स्वीकारो नमन मेरा में बालक नादान
प्रथम गुरु है माता हमारी
दूजा पिता श्री भगवान,
धरती की गोद खेंल बने हम इंसान,
चौथे शिक्षक महान करें बारंबार,प्रणाम।
गुरु है ज्ञान के मोती,
ज्ञानदीप की जलाए ज्योति ।
जिनकी छड़ी मार और डांट से ,,,
डर-डर के हमने पढ़ी ज्ञान की पाती ।
गुरु करते नैया भव से पार है,
तभी तो बने हैं देखो देश में है।डॉ वकील जज इंजीनियर बाबू,
गुरु ही जीवन का आधार है ।
गुरु ज्ञान की गंगा जिसमें हर कोई नहाय के होता चंगा,
गुरु ही हमे रामायण, गीता महाभारत वेदों का ज्ञान सुनाते हैं ।
मोबाइल में छुप गया गुरु का ज्ञान,
हाथ जोड़ करू विनय तुम गुरु का करो सम्मान।
शिवा सिंहल आबुरोड।




