
दुनिया भर के शिष्य ,गुरु के चरणों में शीश नवाए।
द्वापर युग के महर्षि वेद व्यास गुरु, की अवतरण तिथि को, गुरु पूर्णिमा पर्व दुनिया मनाए।
पिता ऋषि पाराशर -माता सत्यवती के पुत्र ,वेद नाम से शांतनु राजा हस्तिनापुर, कुल के पूजनीय कहलाए।
नाम कृष्ण व्दयपावन ,कौरव पांडव के पुरखा, वेद रचयिता से नाम हुआ वेद व्यास ,दीप दीपायन में जन्म स्थान से देव्पायन और 18 ऋषि समूह को व्यास कहते, उनमें 18 स्थान ,इसलिए नाम वेद देपायन व्यास नाम से ख्याति पाएं।
महर्षि गुरु वेद व्यास , वेद, 18 पुराण एंव महाभारत- भागवत गीता की रचना करने वाले, चिरंजीवी कहलाए।
गुरु होते ज्ञान के सागर ,हमारे जीवन का अज्ञान भगाएं ।
शिष्य को ज्ञानी बनाएं ,अज्ञान रूपी अंधकार मिटाकर ,ज्ञान प्रकाश ज्योति जलाएं।
सुसंस्कार -सत्य अध्यात्म की राह ,गुरु ही दिखाएं ।
गुरु के चरणों में ,शिष्य सम्मान सहित शीश नवाए।
गुरु का ऋण ,शिष्य कभी चुका ना पाए ऋणी सदा कहलाए।
नैतिक मूल्यों का मार्ग ,सतगुरु ही दिखाएं।
सतगुरु की महिमा, कभी शब्दों में कोई गा नहीं पाए ।
सतगुरु ,शिष्य के विकार, विपदाएं को दूर भगाएं ।
सदगुरु ही ज्ञान वेदांत दर्शन की वाणी, हमें सुनाएं ।
गुरु ही आध्यात्म का मार्ग दिखाएं,
माया मोह के बंधन गुरुवर तोड़े, भवसागर से पार लगाए।
प्रभु मिलन का भक्ति मार्ग गुरुवर ही दिखाएं ।
गुरु की आज्ञा मानकर शिष्य ,सम्मान करें गुरु का, खुदका जीवन धन्य बनाएं ।
गुरु हर संकट में देते साथ, मन का बोझ हटाए ।
गुरु पूर्णिमा पर, गुरु चरणों में शीश झुकाए ।
सतगुरु की महिमा हैअपरंपार ,कैसे शिष्य शब्दों में गाएं ।
गुरुदेवो के चरणों में कोटि -कोटि नमन, श्रद्धा सम्मान चढ़ाएं ।
गुरु ब्रह्मा ,गुरु विष्णु ,गुरुदेव महेश्वर।
गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः। ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश




