
मीरजापुर(राजगढ़)।अज्ञान के तिमिर को मिटाकर ज्ञान, संस्कार व सदाचार के दिव्य प्रकाश से जीवन को आलोकित करने वाले समस्त पूज्य गुरु जनों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है उनकी अहैतु की कृपा से ही शिष्य को धर्म, विवेक और राष्ट्र आराधना की सच्ची प्रेरणा प्राप्त होती है।
मानवता का पथ प्रदर्शक कर एक श्रेष्ठ व संस्कारवान समाज का निर्माण करने वाले सभी पूज्य गुरुजनों को कोटि सह नमन।
परमहंस आश्रम में बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। आश्रम के वरिष्ठ संत नारद महाराज ने बताया कि इस बार देशभर से 13 लाख से अधिक श्रद्धालु सदगुरुदेव भगवान स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। आश्रम में भजन कीर्तन, सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचन होंगे। श्रद्धालुओं के लिए दर्शन आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं को शुद्धिण किया गया है। आश्रम में जुटे आशीष महाराज ने बताया कि विभिन्न परमहंस आश्रमों से संत महात्मा भी पहुंच गए हैं। ट्रस्ट की ओर से स्वामी जी के आध्यात्मिक साहित्य की स्टाल भी लगाए गए हैं।

लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को देखते हुए आश्रम परिसर में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
सक्तेशगढ़ परमहंस आश्रम में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। पूरे मेला क्षेत्र को 14 सेक्टर और 12 जून में बांटा गया है।
हर सेक्टर में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है। प्रवेश और निकास मार्ग अलग-अलग रखे गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर रूट डायवर्जेंट भी लागू किया जाएगा। पार्किंग, पेज जल साफ सफाई, बिजली और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था है। 13 लाख से ज्यादा श्रद्धालु और 300 संतों के पहुंचने की संभावना है। 27 से 29 जुलाई तक सभी व्यवस्थाएं सक्रियता के निर्देश दिए गए हैं।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि जब मनुष्य की आत्मा जागृत होती है तभी उसके भीतर सच्चे भजन की शुरुआत होती है सद्गुरु का स्मरण और उनके बताएं मार्ग पर चलना ही जीवन की सही दिशा देता है। शरीर नश्वर है लेकिन गुरु से प्राप्त ज्ञान और उनकी कृपा साधक को आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ती है। सत्संग में संतों ने कहा कि गुरु के वचन सड़क के भीतर चेतन जागते हैं उसे प्रत्येक कर्म के प्रति सजक बनाते हैं जैसे-जैसे भजन कीर्तन आध्यात्मिक चेतना बढ़ाती है मनुष्य का चित् सांसारिक आकर्षण से हटाकर प्रभु के चरणों में लगने लगता है। भक्ति के मार्ग पर अमीरी गरीबी का भेदभाव नहीं होता।

