
जन्मदिवस पर आपका,चाहूँ मैं आशीष।
हरदम ही देते रहें,आप सभी बख्शीश।।
सदा मुझे मिलता रहे,सबका नेह दुलार।
आप सभी आशीष दें, मानूँ मैं आभार।।
प्रभुवर मन में हो सदा, प्रेम दया का भाव।
लिखने-पढ़ने का रहे, हरदम मन में चाव।।
हे प्रभु मैं विनती करूँ, करना मत लाचार।
हाथ-पैर चलता रहे, शिष्ट रहे आचार।।
गुरुजन का करती रहूँ, सदा-सदा सम्मान।
अनुजन का निज नेह से, रहूँ बढ़ाती मान।।
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पार्वती देवी ‘गौरा’ देवरिया




