
हमालय एशिया में है खड़ा प्यारा।
लगे सब पर्वतों से यह सदा न्यारा।।
शिखर कुंभू जुगल धौलागिरी माला।
निडरता धैर्य संयम की बनी शाला।।
महाभारत पुराणों ने बताया है।
इसी का जिक्र रामायण शि लाया है ।।
तपस्या केंद्र ऋषि शिव का बना न्यारा।
मिले आध्यात्म का बल भी सदा प्यारा।।
लगें ये देव देवी को धरा सुंदर।
रची वैदिक कथा गाथा गुफा अंदर।।
हिमालय एक पर्वत तंत्र -सा शोभित।
शिवालिक है करे सबको सम्मोहित ।।
हिमालय पर्वतों का है बना राजा।
उसी के शीश पर ताज है साजा।।
रहस्यों से भरा शिव धाम जग माने।
रहे परिवार के वे साथ जन जाने
खड़ी उत्तर दिशा में यह हेम माला है।
लगे पावन मनोहर यह शिवाला है ।।
शिखर माला ढकी है बर्फ से सारी।
रजत – सी ये दिखें वादी सभी प्यारी।।
यहाँ पर गूँजती है ओम की आस्था।
कहे शिव त्याग की कैलाश है गाथा।।
करें ऋषि – मुनि गुफा में ध्यान जप भी है
बना आध्यात्म का ये ज्ञान तप भी है।।
करे रक्षा सदा यह देश प्रहरी है।
दिखे शिव शिल्पकारी ईश नगरी है।।
लगे यह स्वर्ग जन्नत दैव वादी है।
हिमालय चेतना की दिव्य घाटी है।।
दिशा इसकी बिखेरे धुंध की छाया ।
दिखे है पर्वतों की श्रृंखला की माया।।
लुटाती रश्मियाँ हैं कोख से सोना।
करे नगराज कंचन भाल मणि टोना ।।
पुराणों वेद मानस ने इसे गाया।
बनी थाती जगत में ज्ञान को पाया।।
यही है स्वर्ग का उत्तुंग दरवाजा।
गये तन ले युधिष्ठर स्वर्ग में राजा।। (डॉ मंजु गुप्ता)




