
जुल्म बने है मौन जब , बोल उठो नर आज।
सच के खातिर उठ खड़ो, यही धर्म का साज।।
_2._
झूठ सच बनने लगे, बढ़ अधर्म है पास।
कलम उठाओ हाथ में, कर विरोध तत्काल।।
_3._
सहते-सहते घुट गए, मौन नहीं अब काम।
डरकर जीना मौत है, सच का लो तुम नाम।।
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दीवारें गिरतीं जहाँ, दबती सच आवाज।
जनता मिलकर बोल दे, उस विरोध का राज।।
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नारी पर हो वार तो, कर विरोध तत्काल।
चुप्पी तोड़ी जाय तब , यही वक्त की चाल।।
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सिंहासन डोले तभी, जन बोले सच बोल।
बन विरोध ज्वाला तभी, अंधकार हो गोल।।
_7._
कायरता कह चुप रहो, मत डर नर तू आज।
गलत काम जो सामने,कर विरोध आगाज।।
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शोषण सर पर चढ़ गया, बिक विधान बाजार।
सड़क उतर धरना करो , मांगो तुमअधिकार।।
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मीठी बातों में फ़ँसो, मत देना अब साथ।
गलत देख कर रोक दो, पकड़ो जालिम हाथ।
_10._
है विरोध दर्पण तरह , दिखलाए सच साफ।
करे गलत शोषण जभी , मत कर उसको माफ।।
डॉमंजु गुप्ता।
वाशी, नवी मुंबई



