
प्रात भ्रमण को बाहर निकली, मेघों ने खूब डराया
दौड़ो-दौड़ो घर को भागो, उसने मुझको समझाया।
प्रात भ्रमण —
मेरी प्रिया दामिनी रानी, बहुत अधिक ही है क्रोधी
गुस्से में आ वह मौत बन, सबके ही ऊपर गिरती।
इसीलिए कहता हूँ भागों,कह घर की राह दिखाया।
प्रात भ्रमण —
मैं बोली समझा देना तुम,रहम जरा सा वह कर ले
बैठे-बैठे पैर दुख रहे, टहलें हम सीधा कर लें
मैंने मेघों को अनुनय से,अपनी भी बात बताया।
प्रात भ्रमण–
देखो वह प्यारी है मेरी,उसको कैसे समझाऊँ
मिलने आती है वह ‘गौरा,’कैसे मैं दूर भगाऊँ
बार-बार वह ऐसा कहकर,मन को मेरे फुसलाया।
प्रात भ्रमण —
विवश हुई फिर और करूँ क्या,लौटी मैं सदन की ओर
चलते चलते ही अब देखो, बीत गयी सुहावन भोर
घर जाकर सबसे ‘गौरा’ ने, ये अनुपम बात बताया।
प्रात भ्रमण —
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पार्वती देवी ‘गौरा’ देवरिया उ. प्र.




