
महिला समानता के दावे महिलाओं को पुरुषों के समान लैंगिक न्याय, आर्थिक सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी के समान अवसर प्रदान किए जाने की ओर इंगित करता है, जिसमें महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और न्यायिक प्रयासों के माध्यम से उचित शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य और सम्मान जनक कार्य से जोड़कर आर्थिक-सामाजिक भेदभाव को मिटाकर , राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी से एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण करना रहा है, जिसके लिए हमारी वर्तमान सरकार विभिन्न योजनाओं, नियमों व शर्तों के माध्यम से अनवरत प्रयासरत है।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हमारी भारत सरकार ने विभिन्न कानूनी नियमों में फेर-बदल भी किया है ताकि महिलाओं को सीधे इसका लाभ मिल सके और लक्षित योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को शैक्षिक व आर्थिक रूप से सम्बल बना उनमें राजनीतिक भागीदारी व निर्णय लेने की क्षमता का विकास कर किए गए दावों को आकार प्रदान कर महिलाओं को पुरुषों के समान ही सशक्त स्तम्भ के रूप में प्रतिष्ठित कर सकें ताकि एक पूर्ण विकसित समाज का निर्माण हो सके।
इस हेतु महिला समानता के अनेकानेक दावे निम्न प्रकार से है,,,,
1. मानवाधिकार
2. आर्थिक विकास
3. सामाजिक विकास
4. शिक्षा के समान अवसर
5. उत्तम स्वास्थ्य सेवा
6. रोजगार के समान अवसर
7. राजनीतिक प्रक्रियाओं में समान भागीदारी
8. कार्यस्थलों/कार्यक्षेत्र में भेदभाव का अंत
9. घरेलू हिंसा/उत्पीड़न से मुक्ति
10. सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा
उक्त विभिन्न समानता के दावों के माध्यम से समाज में महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ व सशक्त बनाने के लिए हमारी भारत सरकार निरन्तर प्रयासरत है , इस हेतु सरकार ने महिलाओं के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए जो राष्ट्रीय /अन्तरराष्ट्रीय नीतियाँ बनाई हैं वे निम्नवत् हैं,,,,
1. कानूनी में बदलाव _ ताकि महिलाओं को समान वेतन और सम्पत्ति पर समान अधिकार के साथ-साथ यौन शोषण को रोका जा सके।
2. शिक्षा व स्वास्थ्य योजना में बदला _ ताकि कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके और स्वास्थ्य की रक्षा किया जा सके(बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना व उज्जवला योजना के माध्यम से)
3. महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान करना/बैंकिंग लेन-देन को सरल बनाना।
4. राजनीतिक क्षेत्र / राजनीतिक निर्णय लेने में महिलाओं क भागीदारी को बढ़ावा।
5. इंटरनेट व सोशल मीडिया के अधिकाधिक प्रयोग के माध्यम से महिलाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाना।
6. सामाजिक विसंगतियों को (शराब/नशा /जमाखोरी आदि)दूर करने में महिला नेतृत्व व महिला संगठनों को महत्व देना।
7. विभिन्न उद्योगों में प्रवेश के लिए आवश्यक साधन प्रदान करना(कौशल विकास के माध्यम से रोजगार क्षमता/वित्तीय क्षमताको बढ़ाना)।
महिलाओं के हितों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा वैश्विक स्तर भी कुछ अन्तर्राष्ट्रीय प्रथाओं व प्रतिबद्धताओं को अपनाया और अनु मोदित किया गया,,,
1.ओईसीडी का निर्माण( आर्थिक सहयोग और विकास संगठन) _ ताकि नाॅर्डिक देशों यथा- डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन, आइसलैंड व नार्वे की तरह कार्यस्थलों पर व, घर में व राजनीतिक क्षेत्र में महिलाएँ चैंपियन रहें।
2. महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन (CEDAW) को भी अनुमोदन प्रदान किया गया। यह एकमात्र ऐसा मानवाधिकार है जो *महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की* पुष्टि करता है।
3. बीजिंग घोषणापत्र और कार्य मंच _ इसे महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए सबसे अधिक *प्रगतिशील खाका* माना जाता है।
लेकिन अब प्रश्न ये उठता है कि सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने में जिन कानूनी प्रावधानों में परिवर्तन किया गया या राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं व प्रतिबद्धताओं को अपनाया गया/अनुमोदित गया,,, क्या उससे हमारी महिलाओं के विचारों और स्थिति में परिवर्तन से महिलाएँ सशक्त हुई है और समानता को बढ़ावा मिला है,,,??? इस प्रश्न के उत्तर में कहना चाहूँगी कि ,,,,,
लैंगिक भूमिकाओं और रूढ़ियों को बनाए रखने में पारंपरिक विचार और सामाजिक न्याय अभी भी समानता की राह में रोड़ा बने हुए हैं।
लैंगिक हिंसा , उत्पीड़न और भेदभाव आज भी व्यापक समस्या बनी हुई है, जो महिलाओं के अधिकारों और कल्याण के लिए हानिकारक है।
अतः महिला सशक्तिकरण के लिए हमें कुछ एक ऐसे पहलुओं को अपनाना होगा जो—-
1. लिंग-संवेदनशील शिक्षा पाठ्यक्रमों के माध्यम से पूर्वाग्रहों का खंडन कर सके और समानता को बढ़ावा दे सके।
2.महिलाओं में भौतिक, आध्यात्मिक, शारीरिक व मानसिक सभी स्तरों पर आत्मीयता कर उन्हें सशक्त बना सके।
3.भारतीय संस्कारों को जीवित रखते हुए महिला सशक्तिकरण को गति प्रदान करना।
अन्त में इस ओर भी ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगी कि वर्तमान में महिला सशक्तिकरण के आर्थिक दावों ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति में तो सुधार किया है लेकिन समाज में बढ़ रहे दाम्पत्य विघटन/पारिवारिक विघटन की संख्या में भी वृद्धि की है,जो कि एक शोचनीय स्थिति है।
डाॅ०(कु०)शशि जायसवाल, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
@स्वरचित मौलिक एवं अप्रकाशित लेख।




