साहित्य

प्रभु कृष्ण की माखन चोरी पर कुंडलियाँ वात्सल्य रस

 डॉ मंजु गुप्ता

शैशव से ही कृष्ण की , करती लीला दंग।

माखन चोरी खूब की, ग्वाल बाल के संग।।

ग्वाल बाल के संग, सभी गोपी घर जाते ।

तोड़ें छींका गोप , गिरा के माखन खाते।।

कहे ‘मंजु’ है सत्य, पाठ दे बल का वैभव।

रहें बाल जब स्वस्थ , खिलेगा घर -घर शैशव।।

 

2

चोरी माखन लाल की , पकड़े गोपी श्याम ।

करे शिकायत मातु से , बाँधा कान्हा शाम।।

बाँधा कान्हा शाम, क्रोध में गोपी बोले।

चलो उसे तुम देख , नहीं अब रस्सा खोले।।

कहे ‘ मंजु’ है सत्य, करे सुत भोजन गोरी।

गिरी देख के दृश्य , लगे है मोहक चोरी।।

3

गोपी सोचे एक दिन , कृष्ण पकड़ तरकीब।

घण्टी उसने बाँध दी , मटकी संग करीब ।।

मटकी संग करीब , कहे है उसको गोरी।

बजना करते कृष्ण , यहाँ पर माखन चोरी।।

बजी बड़ी वह जोर , कृष्ण को पहना टोपी।

पकड़े कान्हा चोर , लक्ष्य पर विजयी गोपी।।

डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवी मुंबई

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