
सावन आया झमाझम वर्षा लाया, साजन संग मन हरसाया ।
सृष्टि ने तपन से पीछा छुड़ाया, वर्षा ने जल -अमृत बूंद -बूंद बरसाया।
धरती ने हरियाला सुंदर रूप दिखाया।
तरु पल्लव -पुष्पों ने ,धरती को खूब सजाया।
सजनी ने भी साजन के लिए ,सोलह श्रृंगार कर ,रूप दिखाया।
काले बादल उमड़- घुमड़ के बरसे, नदी झरनों ने पानी खूब बहाया।
खेतों में फसले मुस्काई, किसान हरसाया ।
सावन में पड़ गए झूले ,साजन ने सजनी को झूला खूब झुलाया।
सावन के रंग में ,अंग -अंग झूम रहा है ,संग में है साजन, सावन आया।
वन ,उपवन को ,सावन की वर्षा ने फूलों की खुशबू से महाकाया।
कोयल ने कुहू -कुहू ,पपिहा ने पीहू- पीहू गीत सुनाया ।
चहके सारे पक्षी ,मोर ने सुंदर नृत्य दिखाया।
जनजीवन में ,सावन ने आशादीप जलाया ।
सावन में देवता और प्रभु विष्णु, शिव भक्ति, का मन है भक्तों ने बनाया ।
चातुर्मास ने शुभ कार्य शादी ,मुंडन, गृह प्रवेश पर बंधन है लगाया ।
मानव ने भी चौमासे में ,भागवत कथा -व्रत -पूजन -ध्यान में मन लगाया।
शिव भक्तों ने शिवलिंग पर, जलाभिषेक कर पुण्य पाया।
कावडि़यों ने कावड़ पदयात्रा करके प्रभु शिव को अभिषेक कर खूब मनाया ।
आसमान में चमकी बिजली ,सावन ने जग को चमकाया।
शीतल सुंदर पवन बहे, जीव जंतुओं ने सुख पाया ।
भर गए पोखर -ताल -तलैया ,बच्चों ने कागज की नांव को तैराया ।
सजनी ने संदेश भेजकर ,साजन को परदेस से बुलाया ।
सावन आया, झमाझम वर्षा लाया, जगत हरसाया ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।



