
स्वतंत्रता संग्राम दीवानों में,योद्धा चंद्र शेखर आजाद।
नाम भूल न सकता किशोर,वीर चंद्र शेखर आजाद।।
बड़े हिम्मती और बहादुर,भारत माँ के लाल आजाद।
आजादी के मस्तानों में यह,अमर नाम रहा आजाद।।
देशप्रेम के उत्कृष्ठ अनुरागी,आजादी के सच्चे दीवाने।
प्रण लिए बहादुर प्राणों के,न्योछावर के हुए दीवाने।।
चंद्र शेखर का वास्तविक नाम,चंद्र शेखर तिवारी था।
पितु पं.सीताराम तिवारी,मातु नाम जगरानी देवी था।
कम उम्र में घर त्याग,स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े।
1921में असहयोग आंदोलन,दौरान वे गिरफ्तार हुए।।
मजिस्ट्रेट ने नाम पिता का नाम,पता पूछा देखते हुए।
वह अपना नाम’आजाद’,पिता का नाम’स्वतंत्र’ कहा।।
घर का पता’जेल’ बताए,बड़ी निर्भीकता से था कहा।
उसी दिन से उन्हें एक नई उपाधि मिली ये ‘आजाद’।।
तभी से जानने व कहने लगे उन्हें,चंद्र शेखर आजाद।
ऐसे थे वीर निडर निर्भीक,महान चंद्रशेखर आजाद।।
असहयोग आंदोलन समाप्त,होने बाद वे सलग्न हुए।
सशस्त्र क्रांति के पथ चल पड़े,आकर्षित बढ़ते हुए।।
‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’से हैं जुड़े और।
धन जुटाने हेतु काकोरी ट्रेन,एक्शन(1925)के दौर।।
उसमें चंद्रशेखर आजाद ने,है प्रमुख भूमिका निभाई।
लाला लाजपत राय के मृत्यु,के बदला लेना है भाई।।
उन्होंने ही सांडर्स की हत्या की,योजना भी थी बनाई।
उसके खुद वह चंद्र शेखर,आजाद नेतृत्वकर्ता भाई।।
27 फरवरी 1931 के है,इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क।
वर्तमान काल उसका नाम,चंद्रशेखर आजाद पार्क।।
अंग्रेजों ने चारों तरफ से,आजाद को जब घेर लिया।
वे बहादुरी से लड़ते रहे,उन्हें सुरक्षित निकाल दिया।।
प्रतिज्ञा पालन कर खुद को,अंतिम गोली मारते हुए।
सर्वोच्च बलिदान देते हुए,वे वीरगति को प्राप्त हुए।।
ऐसे महान क्रांतिकारी वीर,को शत शत नमन करूँ।
निडर निर्भीक बहादुर,क्रांतिकारी सदैव वंदन करुँ।।
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रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)




