
ये झंडा नहीं झुकने देंगे हम कसम माँ भारती की खाते हैं,
जान भी दे देंगे वतन पर, हम नमक देश का खाते हैं।
सीमा पर जब संकट होगा, सीना तान खड़े हो जाएँगे
भारत माँ की पावन माटी पर, हँसते-हँसते शीश चढ़ाएँगे।
हिमगिरि जैसा अटल इरादा, सागर जैसा गहरा मान,दुश्मन सुन ले कान खोलकर, भारत है वीरों की शान।
तिरंगे की हर एक लहर में, शहीदों का बलिदान बसा,इसकी आन बचाने खातिर, हर भारतवासी है हँसता।
जब तक साँसें चलती होंगी, जय-जय भारत गाएँगे,माँ की पावन चरण-धूलि को, माथे पर हम सजाएँगे।
राणा, भगत, आज़ाद की गाथा, रक्त हमारा गाता है,हर सैनिक के साहस से ही, भारत अमर कहलाता है।
आँधी आए या तूफ़ाँ आए, कदम कभी न रुकने देंगे,भारत माँ के इस तिरंगे को, जीवन भर न झुकने देंगे।
वंदे मातरम् की गूँज सदा, नभ से धरती तक जाएगी,भारत माँ की जय-जयकार, हर पीढ़ी दोहराएगी।
कुलदीप सिंहरुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




