
देश स्वतंत्रता सेनानी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे महान।
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है “नारे से ,धरती गगन किया गूंजायमान।
बिट्रिश शासन के छक्के छुड़ाएं ,था स्वराज का अरमान ।
23 जुलाई 1856 को जन्मे, रत्नागिरी -महाराष्ट्र जन्मस्थान ।
पिता गंगाधर रामचंद्र -माता पार्वती की दिव्य संतान।
गुलाम भारत में, स्वाधीनता जन जागृति का चलाया तेज अभियान।
गणेश चतुर्थी से अनंत चौदस तक, गणेश उत्सव की शुरुआत कर चलाया स्वराज अभियान ।
राष्ट्र प्रेम की ज्योति से जगमग, रोशन हुआ पूरा हिंदुस्तान ।
लोक जागरण मान्यता से लोकमान्य पदवी देकर उनका हुया सम्मान।
“लाल -बाल -पाल “नाम से स्वाधीनता सेनानी त्रिवेणी संगम ने, स्वाधीनता संग्राम में दिया योगदान।
धैर्य ,त्याग ,साहस ,कर्म योग दर्शन, दृढ़ संकल्प से स्वाधीनता के लिए दिया बलिदान ।
लाल -लाला लाजपत राय ,बाल- बाल गंगाधर तिलक ,पाल -विपिन चंद्र पाल ,तीनों “लाल बाल पाल” क्या हुआ यशगान।
स्वाधीनता सेनानियों का हुआ आंदोलन ,मांडले जेल में कैद, लाठियां की मार, झेली, अमर रहेगा उनका बलिदान ।
राष्ट्र धर्म चेतना जागृति में, केसरी और मराठा पत्रों से किया शंखनाद, गुंजा धरती आसमान ।
स्वधीनता सेनानियों ने किया कमाल, गौरव गाथा पर है गर्व अभियान ।
राष्ट्रवादी राजनीतिज्ञ ,दूर दृष्टा, समाज सुधारक तिलक ने चलाया स्वाधीनता अभियान ।
स्वाधीनता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने, शिरडी वाले साईं बाबा से सहयोग लेकर, मांगा स्वाधीनता का वरदान।
1 अगस्त 1920 में मुंबई में देवलोक गमन से हुआ देह अवसान।
उन्हें अर्पित कोटि-कोटि नमन, अर्पित है श्रद्धा सुमन सम्मान ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है




