मय का चक्र है जो चलता रहता,
चलना उसका काम है,
चक्र रुक जाएगा तो दुनिया बदल जाएगी,
और चक्र रुक जाएगा तो जीवन जिंदगी ही खत्म हो जाएगी,
जीवन का चक्र है आज बच्चे हो कल युवा हो फिर कल वृद्ध भी होना है,
और वृद्धावस्था में सारी जिंदगी की तस्वीर घूम जाएगी,
किस तरह व्यक्ति अपने आप को सुबह से ही तैयार करके रात तक लगातार लगा रहता था,
रुकने का काम नहीं न थकता था ना वह किसी से लड़ता था,
मेहनत करके था कमाना यही उद्देश्य पर रखता था,
पर व्यक्ति के जीवन में समय का चक्र है चलता रहता है,
और वह चक्र धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे पराधीनता करके वह बिस्तर पर छोड़ देता है,
जब वृद्ध व्यक्ति असहाय पीड़ित और वह शरीर के उस परेशानियों से व्यथित हो जाता है,
तो वह जिंदगी की वह सारी रील फिर से दिमाग में लाकर रोने लगता है,
मैं क्या था और क्या हूं मैं क्या होता जा रहा हूं और फिर एक दिन दुनिया से ही चला जाऊंगा,
पर जिंदगी का यह जीवन चक्र यह समय चक्र घुमाता रहेगा,
फिर जन्म मरण लेकर फिर व्यक्ति इस धरती पर आता रहेगा आता रहेगा।।
योगेश्वरी भारद्वाज
कोसीकला मथुरा उत्तर प्रदेश




