
अहंकार के बिना जो
बोल उठती है ज़ुबाँ,
वही तो प्यार की अनमोल सी है निशानी ।
इरादे बिन जो दिल में बस्तियाँ आबाद करता है,
वही मोहब्बत की एक पावन है कहानी ।
अपेक्षा के बिना जो धूप में भी जो छाँव बन जाए,
वही तो हर किसी के दर्द की दवा है पुरानी ।
स्वार्थ के बिना जो सजदे में दुआएं हैं झुकती ,
वो हर एक साँस
रब की है महरबानी ।
सच्चे रिश्तों की बस इतनी सी है परिभाषा,
जहाँ शर्तों से परे रूह की है रवानी ।
-डॉ .दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद गुजरात।




