साहित्य

प्रेमचन्द जी की गोदान फिल्म ने 

डॉ रामशंकर चंचल 

मुझे आंचलिक लेखन को प्रेरित किया

किशोर उम्र में, सूचना प्रसारण शासन के द्वारा अक्सर गली और मोहल्लों में फिल्म दिखाई जाती थी तब मैं भी अपनी कालोनी में दस्तक देता उनकी प्रेमचंद जी की फिल्म गोदान देखी बस मेरी आत्मा को अजीब सुख सुकून मिला, अच्छा लगा बहुत फिर मैने जब कहीं प्रेमचंद साहित्य देखा पढ़ा खूब मेरी पास उसे सुरक्षित भी रखा और उन्हें देखता रहा प्रेमचंद जी का चित्र देखकर मुझे लगा कितने बड़े है लगता ही नहीं

कैसे सहज सरल व्यकित्व है

बस उनका साहित्य ही नहीं उनकी छवि भी बस गई मन आत्मा में

आज मेरे उन्हीं गुरुवार का स्नेह प्यार और आशीष है जो सदा ही बना रहा और मैं भी अपने गांव स्कूल में रहते हुए अथाह बेहिसाब लेखन कर गया और मन आत्मा गांव में बस गई

 

 

फिर जब बहुत नाम और प्रसिद्ध होने लगी तो मुझे शहर की बड़ी हाय स्कूल में न जाने कितनी बार आग्रह किया कि मैं केवल हां कर दूं मुझे बुला लेंगे, मैने साफ मना कर दिया वहां के प्राचार्य जी को यहां तक कि झाबुआ के उस समय के कलेक्टर वसीम अख्तर जी, मनोज श्री वास्तव जी और नीरज मण्डलोई जी को इतने जिला कलेक्टर को मना कर देना कोई मामूमी बात नहीं है पर ईश्वर आशीष देखे सभी मुझे नाचीज से बेहद प्यार करते थे, है उन्होंने मुझे कहां कि, चंचल जी आप क्या चाहते हैं वही होगा

 

 

एक गांव के साधारण शिक्षक को जिला के कलेक्टर, चंचल जी आप क्या चाहते हैं वही होगा

संभव है नहीं पर यह सब कुछ ईश्वर आशीष है परम् सत्य है

 

खैर साहब कर रहा था मेरे गुरुवार प्रेमचंद जी की जो मेरे आदर्श रहे और आज झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले पर दस्तक देता हुआ अद्भुत अद्भुत उपलब्धि प्राप्त करता हुआ बेहिसाब साहित्य उन्हीं का आशीष है जिसे देख ख़ुद चकित रहता हूं मैं मैने कितना कुछ लिख दिया एक जन्म में संभव नहीं है यह

खैर राम जाने सब कुछ वही चला रहा वही प्रेरणा देता हुआ मुझे सतत् सक्रिय रखें है

आज प्रेमचंद जी के जन्मदिन पर सत् सत् प्रणाम करता हूं और प्रार्थना करता हूं फिर कोई इसी तरह सृजन शील रहे और भारत के गांव की आत्मा जिंदा रहे

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!