
जाता जाता पच्चीस छब्बीस से यह बोला।
आ रहे हो आ जाओ बस चेतन तुम रहना।
माहौल देश का जो बिगाड़े उस पर लगाम लगाना।
साम दाम दंड जो करना हो उससे चूक न जाना।
बड़े यत्न से मिलीआजादी इस बात को याद रखना।
उन वीरों की कुर्बानी का पाठ याद करवाना।
सत्य सनातन के परचम को गली गली फहराना।
सुख समृद्धि और विकास में देश का हाथ बटाना।
करें देश से गद्दारी जो यमलोक की राह दिखाना।
ये जिम्मेदारी अति जरूरी शांति कायम रखना।
कायदे में सब जशन मनाए यह बात सबको समझाना।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश



