साहित्य

हिन्दी..मेरा गौरव

मधु माहेश्वरी

1…. हिन्द हिन्दी हिंदुस्तान
हिन्दी हिन्दुस्तान का मान

2….सरल सुगम और मीठी-मीठी,अपनी हिन्दी भाषा है
हिन्दी सेवी रहूॅं हमेशा, ये  मेरी अभिलाषा  है

3….है संस्कृत की कोख से जन्मी, देश की राज भाषा है
संस्कृत की उत्तराधिकारिणी, हिन्दी देश की भाषा है

4….वर्षों पुराना इतिहास इसका
दुनियाॅं भर में प्रसार इसका
व्याकरण सम्मत आधार इसका
प्रादेशिक भाषाएं परिवार इसका

5…. गद्य, पद्य ,कहानी, किस्से
दोहे ,छंद, गीत और ग़ज़लें
अपनी हिन्दी में उगती है
हर भावों की सुंदर फ़सलें

6…. हिन्दी में माटी की खुशबू
हिन्दी  ही मेरी गीता
हिन्दी से पहचान है मेरी
हिन्दी मेरी अस्मिता

7….सर्वसमर्थ जन-जन की भाषा
घर से लेकर न्यायालय तक
है  संभव सब पढ़ना-पढ़ाना
नीति-कथा से प्रौद्योगिकी तक

8….एक दिवस का नहीं पर्व ये
निजता का आधार है
हिन्दी से  ही गौरव  अपना
संस्कृति और संस्कार है

9…. हिन्दी सेवी, हिन्द निवासी
हिन्दी है मेरी भाषा
हिन्दी हो हर श्वास में मेरी
इतनी-सी बस अभिलाषा

10….नहीं बैर दूजी भाषा से
पर हिन्दी से मेरा मान
निज भाषा अभिमान है मेरा
हिन्दी से मेरी पहचान

11….दिवस भले ही नहीं मनाएं
पर हिन्दी व्यवहार करें
हिन्दी सोचें , हिन्दी बोलें
हिन्दी में आचार करें

12….नहीं महज़ भाषा है हिन्दी
जीने का ये तरीका है
भारत-भू की संस्कृति को
हिन्दी से ही तो सीखा है
***मधु माहेश्वरी गुवाहाटी असम ✍️ ✍️ ✍️

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