
मां बेटी पत्नी बहन, नारी रूप हजार।
नारी से रिश्ते सजे ,नारी से परिवार।।
नारी रोपे बीज है, नारी वृक्ष सामान।
जीवन का पालन करे,नारी है भगवान।।
सृष्टि नहीं नारी बिना, नारी जग आधार।
नारी के हर रूप की, महिमा अपरंपार।।
कठिन परिस्थिति में सदा,लेती खुद को ढाल।
नारी इक बहती नदी, जीवन करें निहाल।।
खुशियों के रंग से सदा, देती घर को लीप।
नारी रंग गुलाल है, दिवाली की दीप।।
नारी बिन सूना लगे, सारा यह संसार।
चार दिवारी घर बना,नारी से घर द्वार।।
डॉ. पुष्पा सिंह




