
जीवन के इस किस्से में।
हर पल के हर हिस्से में
तुम ही तुम समाई हो मां,
जाने के बाद याद बहुत आई हो मां।
कभी सपनों में मिलती हो
कभी ख्यालों में आती हो।
आज भी मेरी उलझन सारी
तुम ही तो सुलझाती हो।
थकान से चूर जब जब होती हूं।
गहरी नींद में जब मैं सोती हूं।
प्यार से फेर कर सर पर हाथ मुझे फिर बच्चा बनाती हो।
तुम्हारे ख्यालों से ओ मां नई ऊर्जा मुझे मिलती है।
घर बाहर के काम करने की नई शक्ति सी मिलती है।
किस्से तुम्हारे याद करती हूं,
आज तो तुम ही किस्सा बन गई हो।
मां मुझमें ही समाकर तुम मेरा हिस्सा बन गई हो।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




