साहित्य

ग़ज़ल

चनरेज राम अम्बुज

अज़ीज़ दोस्त कभी भी दग़ा नहीं करते।
खुशी हो या हो मुसीबत हटा नहीं करते।

मदद  को हर  घड़ी तैय्यार यार रहते जो,
किसी की देख तरक्की जला नहीं करते।

किसी  से लूट  किसी का लहू बहाते हैं,
कि मद में मोह में इंसान क्या नहीं करते।

कफ़न को बाँध के सर पर जवान जाते जो,
समर  में  दुश्मनों  से  वह डरा नहीं करते।

हरेक शम्अ जलाने की अब जरूरत है,
बिना  चिराग  उजाले  हुआ  नहीं करते।

चनरेज राम अम्बुज

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