साहित्य

जीवन का रिश्ता

राजीव त्रिपाठी

रिश्तो को जीना होता है
ज़हर मिले तो पीना होता है!!
मेरी बात कहांँ तक पहुंँची
रिश्तो को कहना होता है!!
बिना सहारे जीवन है यह
होता वही जो होना होता है!!
पल पल वक़्त बदलते देखा
जिहालत भी सहना होता है!!
लौट के फिर वो नहीं आया है
वक़्त माफिक चलना होता हैं!!
कैसी सज़ा और कैसा जीवन
वक़्त के सांचे ढलना होता है!!
ख़ुशी मिलेगी कभी ग़मों को
होता वही जो हो ना होता है!!
आशाओं का जीवन है यह
स्वप्न में भी रहना होता है!!
माना जीवन स्वप्न नहीं है
जीवन यह जीना होता है!!
संघर्षों से मत घबराना
सोना तप कर ही होता है…

राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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