
बना जीवन
मोबाइल सबका
बहुत काम होता
क्षण भर में
बातें होती विदेश
पहुंचता संदेश।
है मोबाइल
परिवार समाज
बढ़ रहा बाजार
आदत बुरी
घर बैठे मंगाएं
जो भी चीज चाहिए।
हुआ दिवाना
डिजिटल जमाना
करता है आगाज
स्मार्टफोन का
रोज नया वर्जन
बढ़ाए कुपोषण।
ये मोबाइल
सार्थक निरर्थक
बच्चे बूढ़े जवान
सबका लत
छूटा संगी संगत
जीवन बना व्यर्थ।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज




