साहित्य

बगिया

नीलम अग्रवाल रत्न

पूजा को देखने आज लड़के वाले आए थे। लड़की पसंद आने पर लड़का लड़की को अकेले में मिलने का मौका दिया गया। कुछ देर की चुप्पी को तोड़ते हुए अनुज ने शुरुआत की।
आप तो मुझे पसंद है। आप भी बिना किसी दबाव में आए अपना फैसला मुझे बेहिचक बता सकती हैं।
आप बहुत अच्छे इंसान हैं।लेकिन रिश्ता पक्का होने से पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बताना चाहती हूँ। उसके बाद आप जो फैसला लेंगे मुझे मंजूर होगा।
ग्यारह साल की उम्र में उसके सगे चाचा ने उसके साथ जो कुकर्म किया था उसके बारे में उसने सब सच -सच बता दिया।
अनुज अवाक सा उसे देखने लगा।
तो आपने अपने माता पिता को कुछ बताया नहीं?
नहीं मैं बहुत डर गई थी।
लेकिन मैं उस बात को आज तक भुला नहीं पाई हूँ।
उस समय तो आप मासूम सी बच्ची रही होंगी।फिर भी……
सगे चाचा होकर ऐसा कैसे……
लेकिन इन सब में आपका क्या कसूर है।
आप तो एक खूबसूरत फूल हैं।
और मेरा विश्वास कीजिए, ये रिश्ता हो या न हो, आपका ये राज को राज ही रहेगा । ये मेरा आपसे पक्का वादा है ।
और रही बात रिश्ते की, तो ये फैसला मैं पूरी तरह से आप पर छोड़ता हूँ ।
तब पूजा ने कहा, आप बहुत अच्छे इंसान हैं ।
अनुज ने पूछा, क्या आपको और कुछ नहीं कहना है ।
तब पूजा ने नजरें चुराते हुए कहा, आप बहुत हैंडसम भी हैं ।
अब अनुज को अपना जवाब तो मिल चुका था, फिर उसने पूजा से पूछा,
क्या आप अपनी खुशबू से मेरी बगिया को महकाना पसंद करेंगी ?
यह सुनते ही पूजा शर्म से लाल हो गई।
रिश्ता पक्का हो गया।शादी हो गई।
शादी के बाद भी अनुज ने अपना वादा पूरी तरह निभाया।

🙏🙏

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