साहित्य

त्रैमासिक पत्रिका की तरह 15वीं कृति वो गली वो

डॉ चंचल ने 

के मध्य प्रदेश का सर्वाधिक पिछड़ा अंचल झाबुआ जिला जहां साहित्य जैसे गहन और गम्भीर विषय पर बात करना ही बैमानी लगती हैं, उस अंचल में झाबुआ में जन्म हुआ एक साधारण परिवार में दस्तक देता डॉ रामशंकर चंचल एक प्राथमिक विद्यालय का शिक्षक रहे आजीवन गांव में, आज सम्पूर्ण देश और दुनिया में अपने घर की चार दीवारों और रहते हुए वो अद्भुत इतिहास रचा है जो सदियों याद किया जायेगा

मानवता का पुजारी, मानव मात्र पशु पक्षी सभी को प्यार करता हुआ सादगी लिए लिए जीता यह डॉ रामशंकर चंचल आज साहित्य जगत में किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है यह चौंकाने वाला सत्य सैकड़ों की ईर्ष्या है तो कोई आश्चर्य नहीं है, सालो तक प्रिंट मीडिया पर दस्तक दे राज करता सैकड़ों कृतियों को देश में भेंट करता देश की सैकड़ों पत्रिकाओं में बेहिसाब छाया हुआ यह नाम आज सोशल मीडिया पर दस्तक देता हुआ अद्भुत छाया हुआ है जिसके देश और दुनिया के हजारों हजारों हस्तियां और युवा पीढ़ी के मित्र हैं बेहिसाब फालोवर है उनके लाखों लाखों के लिए सम्मान और आदर के पात्र हैं यह सत्य स्वीकार करना पड़ा सोशल मीडिया पर दस्तक देती उनकी पोस्ट को प्रतिदिन हजारों हजारों द्वारा सराही जाना इस बात की प्रमाणिकता है जो सर्व विदित है

आज उन्होंने साबित कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति जो चाहे कर सकता है कोई भी प्रतिभा किसी शहर जाति धर्म की मोहताज नहीं है

चाहिए साफ़ मन आत्मा विश्वास रखें सतत् साधना लीन हो कर्म पथ पर दस्तक दे बस बहुत है आपका आत्मा विश्वास निष्ठा समर्पण और उतम चरित्र आपको सब कुछ देगा और ईश्वर सदा ही उनके साथ है यह बात पूरे आत्मा विश्वास से डॉ रामशंकर चंचल कहते है, आपका सहजता सरलता और दुनिया में सभी को आदर और सम्मान देते हुए कर्म करें अहम से कोसों दूर रहे तभी आपकी आदर और सम्मान मिलेगा प्यार और आशीष मिलेगा

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