साहित्य

मातु कर दो अब दया दे दीजिये वर

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

वसंत पंचमी सफल और शुभ हुई,
माँ सरस्वती पीतवस्त्र देख ख़ुश हुई,
पीली सरसों फूल रही सब खेतों में,
शिशिर जगाता वसंत को सोते में।

शीतल मलयज सुरभित प्रवाह,
गीत संगीत, मधुर रुचिर रसना,
मुदित धरा प्रमुदित रतिदेव प्रभा,
नवरंग तरंगित हिय पूरित सपना।

सुर सुगम्या वागवरदा, वीणावादिनि,
शारदा माँ, कंठवसना, सुस्वरदायिनि,
सरस्वती, सप्त सरगम सिद्धिदायिनि,
श्वेत वस्त्रालंकृता, माँ बुद्धिदायनि।

मातु कर दो अब दया, दे दीजिये वर,
तार सरगम हों सुगम कीजिये झंकृत,
आदित्य करते अर्चना, माँ रचो रचना,
नव ताल हों, नव छंद हों, नव वंदना।

विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ:

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