साहित्य

शुभ बसंत

डॉ रामशंकर चंचल

लो फिर आ गया
निराला का बसंत
मां सरस्वती का अहसास
करता हुआ
अजीब सुख सुकून देता
सक्रिय रखता, कमाल की
उर्जा समेटे
कितना प्यारा है न
मन, मस्तिष्क में
खुशी भर देता
कभी टिशू के रंग में
नहला देता
कभी झूमते हरे भरे पत्तों के
संगीत में मत कर देता
देखा न , कितनी अजीब
मस्ती उमंग ओर उन्मुक्तता
छाई है चाहिए तरफ़
चलो हम भी इससे
कुछ ग्रहण कर
जीवन में रस भरे और
जो जाए, इसके संग
सरोवर हो
ताकि बीत जाय
यह वर्ष भी सदा की तरह
खुशनुमा जीवंत सजीव
सृजन उपलब्धि लिए
देश दुनिया को कुछ देते हुए
सार्थक परिणाम
जीवन की अद्भुत परिभाषा
देर किस बात की
जागें उठे, त्याग दे
भीतर की निराशा
कुंठाए और
मस्त हो जाएं
इसके संग ताल से ताल मिला
सत् सत् नमन करते

डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!