
भारत को ‘सोने की चिड़िया’,बनाने वाला राजा।
वह महान व्यक्ति कौन? रहा,प्रतापी महाराजा।।
कौन था राजा? जिसके,राजगद्दी पर बैठने बाद।
श्रीमुख से उसके देववाणी,की निकले आवाज।।
देववाणी से उनके शासन में,यह न्याय होता था।
उस राजन के राज्य में,अधर्म का नहीं वास था।।
महाराज विक्रमादित्य जी,हिंदुस्तान के राजा थे।
स्कूली-बच्चे अनभिज्ञ हैं,वह कैसे महाराजा थे।।
देश के बच्चों को इसका,शून्य बराबर ये ज्ञान है।
हिन्द का स्वर्णिम काल था,उसका न संज्ञान है।।
भारत को महाराजा ही,स्वर्ण विहाग बनाया था।
तभी तो’भारत सोने की चिड़िया’कहलाया था।।
उज्जैन के महाराज गन्धर्वसेन,को थी 3 संतान।
सबसे बड़ी लड़की का भैया,मैनावती था नाम।।
उससे छोटा रहा गंधर्वसेन,का एक पुत्र भर्तृहरि।
सबसे छोटे पुत्र विक्रमादित्य,वो प्रिय धर्म-हरि।।
बहन मैनावती की शादी,धारानगरी के राजा से।
राजा पदमसेन संग परिणय,बहुत धूमधाम से।।
उनको एक लड़का हुआ था,गोपीचन्द नाम था।
वह श्रीज्वालेन्दर नाथ से,योग दीक्षा लिया था।।
बाद में तपस्या हेतु गोपीचंद,जंगलों में चले गए।
मैनावती श्रीगुरू गोरक्षनाथ,से दीक्षित हुईं गए।।
आज भारत देश व यहाँ की यह संस्कृति केवल।
विक्रमादित्य के कारण ही अस्तित्व में है प्रबल।।
सम्राट अशोक मौर्य ने,बौद्धधर्म अपना लिया था।
बौद्ध बन कर 25वर्ष,उन्होंने भी राज किया था।।
भारत में सनातन धर्म,करीब समाप्त हो गया था।
यहाँ पर ये बौद्ध धर्म-अन्य धर्म,तो बढ़ गया था।।
रामायण और महाभारत-सा,ग्रन्थ तो खो गए थे।
महाराजा विक्रमादित्य ही,पुनः उनको खोजे थे।।
विक्रमादित्य ने पावन ग्रंथों,को पुनर्स्थापन किया।
विष्णु जी-शिव जी के कई मंदिर है बनवा दिया।।
पुरा सनातन धर्म की रक्षा,किए उसे बचाए खास।
विक्रमादित्य के 9 रत्नों में,से एक थे कालिदास।।
जिन्होंने अभिज्ञान शाकुन्तलम,जैसा ग्रंथ लिखा।
उसमें देश भारत का,सम्पूर्ण इतिहास है लिखा।।
अन्यथा महान भारत का,इतिहास ये क्या रहता।
हमें योगेश्वर श्रीकृष्ण-श्रीराम ही विस्मृत रहता।।
हमारे ये ग्रन्थ ही भारत में,खोने के कगार पर थे।
उज्जैन के ये राजा भर्तृहरि,के मन वैराग्य में थे।।
श्रीगुरू गोरक्षनाथ जी से योग की दीक्षा लेने गए।
तत्पश्चात तपस्या करने,घने जंगलों में चले गए।।
सारा राजपाट छोटे भाई,विक्रमादित्य को दे दिए।
इन्होंने भी श्रीगुरू गोरक्षनाथ,से योगदीक्षा लिए।।
गुरू से दीक्षा लेकर निज,राजपाट सम्भालने लगे।
भारत के विकास को वो,तन मन धन से थे लगे।।
हमारी भारतीय संस्कृति-सभ्यता,ये बचा हुआ है।
आज उन्हीं के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है।।
महान विक्रमादित्य ने केवल धर्म ही नहीं बचाया।
देश को आर्थिक तौर से,स्वर्ण चिड़िया है बनाया।।
ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
(शिक्षक,कवि,लेखक,समीक्षक,लघुकथाकार एवं समाजसेवी)
इंटरनेशनल ज्वाइंट ट्रेजरर, 2023-2024, ए. सी.आई.
वरिष्ठ समाजसेवी-प्रांतीय,राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय सेवा संगठन




