साहित्य

ये झंडा ऊँचा रहे हमारा

कुलदीप सिंह रुहेला

ये झंडा ऊँचा रहे हमारा, भारत की शान रहे,
हर युग में इसकी छाया में, बलिदान महान रहे।
मिट्टी-मिट्टी वीर कहानी, इतिहासों का गान रहे,
सीने में अंगार जले, बस भारत माँ की आन रहे।

सीमाओं पर डटे जो सैनिक, नींदों से सौदा तोड़ा,
माँ की लाज बचाने को, हँसकर मृत्यु से नाता जोड़ा।
भगत सिंह का जोश जगा, राजगुरु की वो हुंकार,
सुखदेव की बलि ने लिख दी, आज़ादी की ललकार।

“तुम मुझे खून दो” की गूँज, बोस ने रण में बोली,
“मैं आज़ादी दूँगा” कह, नस-नस में बिजली घोली।
संविधान बना जब भारत का, न्याय बना आधार,
कलम ने तब तलवार बनी, गढ़ा लोकतंत्र का आकार।

रानी झाँसी की हुंकारों से काँपा था अंग्रेज़ी ताज,
महाराणा प्रताप ने सिखाया, स्वाभिमान ही असली राज।
हर युग कहे, हर जन गाए, भारत अमर कहानी,
ये झंडा ऊँचा रहे हमारा—बस यही ज़िंदगानी।

ये झंडा ऊंचा रहे हमारा यही है गणतंत्र हमारा !
जय हिन्द जय भारत!

कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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