
भौंरे फूलों पर करें, मीठी सी गुंजार।
धीरे धीरे घुल रही, कानों में झंकार।।
मानो मीठा बज रहा, यह वीणा का तार।
कानों को मधुरिम लगे,इसकी यह झंकार।।
पायल के घुँघरू करें, इक दूजे से रार।
पर मन में सब घुल रहा,बन करके झंकार।।
राधा आगे जा रही, पीछे हलधर बीर।
फाग खेलने के लिए, पहुँचे यमुना तीर।।
विरही सारी गोपियाँ,मन मन भरे उसास।
सोचें कैसे वे सभी, पहुँचें कान्हा पास।।
चनरेज राम अम्बुज




