साहित्य

सीता

डॉ स्वाति पांडेय प्रीत

जनक सुनयना के घर आयी ,
सिय मिथिला की जान ।
आदर्शो की वे प्रतिमूर्ति ,
रघुकुल की है शान ।।

कनकवर्णी नीलकेश धारी,
मुख पूर्ण चंद्र युक्त ।
सुमध्यमा कमल नयन सीता ,
छल-प्रपंच से मुक्त ।।

धैर्यवान क्षमाशील स्वरुप,
सौम्य निश्चल प्रतिरुप ,
करुणामयी त्याग की सेवी ,
सुन्दर मनोहर रुप ।।

निष्ठगा अरु समर्पण की देवी ,
राघव प्रिया सुजान ।
समाज व परिवार की खातिर,
देती अपने प्रान ।।

डॉ स्वाति पांडेय प्रीत
लखीमपुर-खीरी
उत्तर प्रदेश

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