
मौत का बन गया इश्तिहार आदमी
आदमी का हुआ है शिकार आदमी//
चंद नोटों की खातिर भुला सब दिया
चढ़ गया तुझ पे कैसा ख़ुमार आदमी//
हौंसला ख़ुद को दे बात बन जाएगी
किसका तुझको यहाँ इंतजार आदमी//
चाहिए गर नतीज़े तुझे नेक ही
ख़ुद पे शैतान मत कर सवार आदमी//
सोच कर काम कोई करेगा अगर
शोक का तू न होगा शिकार आदमी//
तू किसी की कहानी का पतझड़ न बन
तेरे हर ओर होगी बहार आदमी//
काम गर तू किसी के न आया कभी
कौन तेरी सुनेगा पुकार आदमी//
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ उत्तर प्रदेश




