
भूख गरीबी बेकारी के दिन देखें हैं।
मैंने अपनी लाचारी के दिन देखें हैं।
जीवन के सपने सब चकनाचूर हुए,
मैंने अपनी खुद्दारी के दिन देखें हैं।
बड़े – बड़े संघर्ष कभी छोटे पड़ जाते,
मैंने जीवन की दुश्वारी के दिन देखें हैं।
गूढ़ अक्षरों लिखी इबारत धूमिल पड़ती,
इनकी उनकी मक्कारी के दिन देखें हैं।
कहां खो गया बचपन अपना नन्हा-सा,
यौवन ने तो संगसारी के दिन देखें हैं।
भाग्य बांचती हस्तरेख अब मिटे कहां,
कर्मफलों की गुणकारी के दिन देखें हैं।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890




