साहित्य

गज़ल

ममता झा मेधा

जब हम उठते हैं तुम्हारा ध्यान करते हैं।
बातो पर तेरी सदा अभिमान करते हैं।।

मेरे दिल में धड़कता है भारत सदा ही।
अपने देश पर हम सब कुर्बान करते हैं ।।

रोजी रोटी के लिए हम सब प्रवासी हैं।
हरदम अपने देश का गुणगान करते हैं।।

यादों में उनको सभी हम गुनगुनाते हैं।
आशा के वे दीप हम सम्मान करते हैं।।

फल मिलता ही है सदा निज कर्म का प्यारे।
ममता दिल से आप का अहसान करते हैं।।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज

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