साहित्य

बुरबक पिया

चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा "अकिंचन"

चुलबुल नाचत नयन लखि,बुरबक पिय गइल डेराय।
कउन रोग भइल इ अँखियन में,लेहलस वैद्य बुलाय।।
लेहलस वैद्य बुलाय उ ,रोइलस कह बिपदा समुझाय।
उँच नीच कुल समझइलन बैदा,मन ही मन मुस्काय।।
नयन रोग ना ह ऐ बबुआ,काम-ज्वर बा रहल सताय।
तनिक ध्यान द मजगर रोगिया पे,कहलं उ मनसाय।।
दवा दुआ कर देईं सगरो,देहियां क रोगवा देईं भगाय।
शहरी बैदा के लगे तू जा,क्लीनिक राह देलैय बताय।।
दवादुआ फरियाई ओहिजा,ऊलम दूलम के बतियाय।
आपन गटई छोडा़य के बैदा,उनके देहलं राहदेखाय।।
✍️चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा “अकिंचन”
चलभाष-9305988252

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