साहित्य

एहसास जिन्दगी का

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

एहसास जिन्दगी का होने लगा जब साथ हो।
प्रभु प्रेम राह बता दिये, जब आप मिल गये हो।

एहसास जिन्दगी का कैसा भी रहे न बताएं
मज़ाक सब बनाते हैं राह कोई न दिखाएं।।

सच्चा हमदर्द इस दुनिया में मिलता फिर कहाँ।
रोना तो आपके सामने करते फिर खंजर वहाँ।

एहसास जिन्दगी का सहारा केवल राम है।
विश्वास उस पर ही रखो जिसका राम नाम है।

ख्वाबों की दुनिया हम बसा लेते हैं यहाँ।
ख्यालों के एहसास में जिन्दगी को देखा कहाँ।।

मन के मंदिर में प्यार का दीप जला खुशियाँ दें।
जो सपने देखे हैं उनका एहसास कर पूरा करें।।

एहसास जिन्दगी का आज पक्का हो रहा
एक बेबस जिन्दगी, जिंदगी की हत्या कर रहा है।

चिंता सता रही है कि मेरे बाद इसका क्या होगा।
हत्या कर यह सत्य वह पुलिस को बता रहा है।

हमारे बुजुर्ग यह राह क्यों चुनने पर मजबूर हुए।
बच्चों के होते हुए भी जिन्दगी में ऐसा क्यों हुआ।

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश

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