अद्भुत कालजयी, आदिवासी कविता डॉ रामशंकर चंचल की अंग्रेजी अनुवाद, स्वर रंजीता निनामा द्वारा

झाबुआ मध्य प्रदेश के आदिवासी पिछड़े अंचल पर केंद्रित कविता आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ के जीवन दर्शन पर दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कविता है जिसका अनेक भाषाओं में भीली, उर्दू, तमिल और भोजपुरी आदि आदि में अनुवाद किया गया है
मेरे स्व परम मित्र महिपाल भूरिया

आदिवासी सृजन के चर्चित लेखक ओर उपन्यास कार है उनका कथन याद आता है कि चंचल जी , में खुद आदिवासी हूं पर अपने जीवन में इतनी गहन गम्भीर सोच और चिंतन लिए अद्भुत जीवन दर्शन पर दस्तक देती सटीक कविता नहीं लिख पाया सचमुच बेहद सुखद अहसास हुआ
चंचल जी और इतना ही नहीं उन्होंने
अपनी अनेक कृतियां में खुद की इस कविता को मेरे नाम से सम्मानित किया स्थान दिया
डॉ पुलकिता सिंह आनंद द्वारा अनुवाद अंग्रेजी भाषा में दस लघु कथाओं की अंग्रेजी भाषा की अद्भुत अमेज़न कृति में अन्त में प्रकाशक द्वारा इस कविता को बहुत ही आदर से सम्मानदेते हुए पूरा प्रेज पर हिन्दी भाषा में दस्तक दी गई
यही कविता गेल लिमिटेड गेलर झाबुआ की हिंदी भाषा कार्यशाला में डॉ रामशंकर चंचल द्वारा प्रस्तुत की गई जिसके विडियो को सोशल मीडिया में दस हजार से अधिक द्वारा सुन कर बेहद सराही गई
आज उसी अद्भुत कविता को इयर होस्टेस रंजीता निनामा द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया और उन्हीं के स्वर में उम्दा प्रस्तुति के साथ उनके द्वारा वीडियो बना यूं ट्यूब चैनल पर दस्तक दे गया जो इतना अद्भुत सुखद यादगार प्रस्तुत किया है कि इस कविता को हिन्दी भाषा में दिखाते हुए उसका अंग्रेजी अनुवाद रंजीता निनामा द्वारा प्रस्तुत किया गया साथ कविता की गहनता और गंभीरता पर दस्तक देते हुए विचार रखें और अद्भुत कविता अनुसार चित्रों को समेटे हुए गांव की आदिवासी लोक संस्कृति के संगीत द्वारा उसे सजाया गया है जो सचमुच रमणीय और स्मरणीय है जो सभी को बेहद प्रभावित करता हुआ दिल और दिमाग में बस जाता है जिसे वह तो सुनेगा ही साथ साथ और को भी सुना कर गर्व महसूस करते हुए सुखद अनुभव करेगा इसमें कोई दो मत नहीं
आत्मा विश्वास जुनून और जीवन की अद्भुत परिभाषा समेट यह कविता सभी को प्रेरणा स्रोत बन गई है जो सदियों जिंदा रहेगी और श्रम निष्ठा और आत्मा विश्वास लिए
जीवन में सदा ही प्रसन्न रहते हुए जीने का अद्भुत संदेश देती हैं
पहली बार हुआ इस कविता का अंग्रेजी विश्व भाषा में अनुवाद जो सारे विश्व पटल पर दस्तक दे झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल के जीवन दर्शन को सम्मान के साथ सार्थक कर दिया है
वंदनीय हैं महान साहित्य साधक आदिवासी सृजन मसीहा सम्मान से सम्मानित डॉ रामशंकर चंचल जी और रंजीता निनामा जी अनेक भाषाओं के ज्ञान को समेटे हुए अद्भुत उर्जा समेटे जीवन में बहुत कुछ कर गुजरने का हौसला लिए है जिनका प्रतिभा पर उनके गर्व होता है वैसे ही पूर्व से वह झाबुआ जिले की पहली एयर होस्टेस रंजीता निनामा के नाम से ख्यात है
इस अनुपम कालजयी उपलब्धि पर डॉ रामशंकर चंचल और रंजीता निनामा को देश और विश्व सहित झाबुआ मध्य प्रदेश से भी सैकड़ों हस्तियों द्वारा गणमान्य व्यक्तियों द्वारा बधाई दी जा रही है प्रतिदिन
वंदनीय हैं डॉ चंचल जी और रंजीता जी का यह सार्थक कार्य जो इतिहास में दस्तक देता हुआ अमर हो गया




