
भक्ति मीरा सी मन में जगाने लगी,
श्याम मुरली की धुन गुनगुनाने लगी।।
नाम कान्हा का जब भी लिया प्रेम से,
मन की पीड़ा स्वयं ही मिटाने लगी।।
राधिका प्रेम का जब सुनाया प्रसंग,
भक्ति गीता का संदेश बताने लगी।।
श्याम चरणों में जब शीश झुकने लगा,
शांति अंतर में अमृत बरसाने लगी।।
आज “सुमन” भी प्रभु प्रेम में डूबकर,
गीत राधा-कन्हैया के गाने लगी।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




