
लो रसोई में सन्नाटा छा गया
लगता सिलेंडर खत्म हो गया
जब से किल्लत बढ़ी बाजार में
एक नया सवाल खड़ा हो गया
अब रोटी किस पर बनाएंगे हम
कैसे घर परिवार चलाएंगे हम
जनता परेशान है यह सोचकर
महंगाई ने जीना दूभर कर दिया
पशुधन भी कम हो रहा देश में
उपले भी अब ढूंढे नहीं मिलते
चूल्हा जलाएं तो लकड़ियां नहीं
रोटियाँ बनाने का संकट हो गया
-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित
भवानीमंडी




