साहित्य

जल ही अमृत बूंँद (गीत)

किरण कुमारी 'वर्तनी'

जल ही अमृत बूंँद प्यारे,
जीवन श्वास बचाए।
बूंँद -बूंँद की कीमत समझे, यह क्षण बीत न जाए ।।
हो प्रयोग आवश्यकता भर ,जल बहने से रोके।
हो सुधार अपने आदत में ,जन-जन को भी टोके।
आंँगन या वाहन धोने में ,पानी नहीं बहाये।
जल ही अमृत बूंँद प्यारे, जीवन श्वास बचाए।।

जमा करें वर्षा का पानी ,टैंक कुंड में भाई ।
हो प्रयोग घर के कार्यों में, जैसे साफ- सफाई ।
जीवन यापन में जल संकट, कभी नहीं गहराये।
जल ही अमृत बूंँद प्यारे , जीवन श्वास बचाए।।

नदियांँ में कूड़ा न बहाने दे ,ले यह जिम्मेवारी।
संत -साधु ने की है रक्षा ,आज हमारी बारी ।
दूषित पानी को पीने से ,तन पीड़ा बढ़ जाए।
जल ही अमृत बूंँद प्यारे, जीवन श्वास बचाए।।

बरखा भी रूठी है मानो, कारण पेड़ छँटाई।
बढ़ा अट्टालिका शहरों में ,भू बंजर हो आई ।
आने वाली कठिनाई का,
आहट मध्यम आए।
जल ही अमृत बूंँद प्यारे, जीवन श्वास बचाए।।

किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर

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